नागरिकता संशोधन विधेयक पर सोमवार को लोकसभा में हंगामा हो गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक तो सदन के पटल पर रख दिया, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे पेश करने का विरोध कर दिया। उन्होंने इसे अल्पसंख्यक विरोधी करार दिया। इस पर शाह ने कहा कि यह बिल अल्पसंख्यकों के 0.001% भी खिलाफ नहीं है। हम हर सवालों के जवाब देंगे, लेकिन वॉकआउट मत करना। मुस्लिम समुदाय का इस विधेयक में एक बार भी जिक्र नहीं किया गया है। लेकिन विपक्षी सदस्य बिल पेश होने का ही विरोध करते रहे और लोकसभा में इस पर करीब एक घंटे बहस होती रही। कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी, शशि थरूर और एआईएमआईएम के असदउद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं ने अपनी बात रखी। विपक्ष की मांग पर बिल पेश करने को लेकर वोटिंग हुई। इसके पक्ष में 293 और विरोध में 82 वोट पड़े। 375 सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा लिया। सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र में सरकार गठन के मुद्दे पर एनडीए से अलग हुई शिवसेना ने भी बिल पेश करने के पक्ष में वोटिंग की।
विपक्ष धार्मिक आधार पर भेदभाव का आरोप लगाकर बिल का विरोध कर रहा है। उनकी मांग है कि नेपाल और श्रीलंका के मुस्लिमों को भी इसमें शामिल किया जाए। इस बिल को अल्पसंख्यकों के खिलाफ और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया जा रहा है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि अगर बिल पेश हुआ तो भारत इजरायल बन जाएगा। थरूर ने कहा कि संविधान देश को धर्म और क्षेत्र के आधार पर बांटने की अनुमति नहीं देता है। इसलिए लोकसभा के रूल्स ऑफ प्रोसीजर एंड कंडक्ट के रूल 72 के तहत बिल पेश नहीं किया जाना चाहिए। यह मूल अधिकारों के खिलाफ है।
- शाह ने कहा कि यह बिल किसी भी तरह से अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है। बिल में कहीं भी मुस्लिमों का जिक्र नहीं है। अगर कांग्रेस धर्म के आधार पर देश का विभाजन नहीं करती तो नागरिकता बिल लाने की जरूरत ही नहीं होती।
- अनुच्छेद 14 के उल्लंघन को लेकर: अगर समानता का कानून होगा तो अल्पसंख्यक के लिए विशेषाधिकार कैसे होंगे? उन्हें जो शिक्षा और अन्य चीजों का अधिकार मिला है, क्या उसमें आर्टिकल 14 का उल्लंघन नहीं होता? जितने भी अनुच्छेद के उल्लंघन की बात की गई हैं, उन्हें ध्यान में रखकर ही बिल ड्राफ्ट हुआ है।
- गैर-मुस्लिमों को नागरिकता के मुद्दे पर: अफगानिस्तान के संविधान के मुताबिक, वह देश इस्लामिक है। पाकिस्तान भी इस्लामिक है। वहीं, बांग्लादेश के संविधान में भी धर्म इस्लाम लिखा गया है। मैं इसका जिक्र कर रहा हूं, क्योंकि इन तीनों देशों के संविधान में धर्म का जिक्र है। शरणार्थियों का इन तीनों देशों से यहां-वहां आना जाना हुआ। नेहरू-लियाकत समझौते में भारत-पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को सुरक्षित करने पर सहमति बनी। भारत में समझौते का पालन हुआ, लेकिन पाकिस्तान में उनके साथ प्रताड़ना हुई। हिंदू, सिख, जैन, पारसियों को परेशान किया गया। पाकिस्तान में मुस्लिमों पर अत्याचार नहीं होता है।
- प्रताड़ित मुस्लिमों को शरण देने पर: शाह ने कहा कि अगर 3 पड़ोसी देशों से कोई मुस्लिम धार्मिक प्रताड़ना के आधार पर नागरिकता की मांग करेगा, तो हम खुले मन से विचार करेंगे।
मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में नागरिकता बिल लोकसभा में पास हो गया था, लेकिन राज्यसभा में अटक गया था। केंद्रीय कैबिनेट से बिल को 4 दिसंबर को मंजूरी मिल गई थी। इस बिल के जरिए अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के गैर-मुस्लिमों (हिंदुओं, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) को भारतीय नागरिकता देने में आसानी होगी।
कांग्रेस समेत 11 दल नागरिकता बिल के विरोध में
कांग्रेस, शिवसेना, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, सपा, बसपा, राजद, माकपा, एआईएमआईएम, बीजद और असम में भाजपा की सहयोगी अगप विधेयक का विरोध कर रही हैं। जबकि, अकाली दल, जदयू, अन्नाद्रमुक सरकार के साथ हैं। बिल का असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भी विरोध है। ऐसे में मोदी सरकार के लिए बिल को संसद पास कराना चुनौती होगा।